![]() |
| हम जीना ही देर से शुरू करते हैं |
एक दिन वह पार्क में बैठा था। उसने देखा कि एक बूढ़ा आदमी एक बैग लेकर धीरे-धीरे रास्ते पर चल रहा है। उस आदमी के चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी।
अर्जुन ने सोचा, “इतनी उम्र में भी यह आदमी इतना शांत कैसे है?”
वह उसके पास गया और पूछा, “बाबा, क्या आप खुश हैं?”
बूढ़ा आदमी मुस्कुराया और बोला, “हाँ बेटा, मैं बहुत खुश हूँ। क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी समय पर जी ली।”
अर्जुन को यह बात समझ नहीं आई। उसने पूछा, “इसका क्या मतलब?”
बूढ़ा आदमी बोला, “जिंदगी छोटी नहीं होती बेटा, हम ही जीना देर से शुरू करते हैं।”
यह सुनकर अर्जुन चौंक गया। उसने पूछा, “कैसे?”
बूढ़ा आदमी बोला, “जब मैं जवान था, तब मैंने हर मौका तुरंत लिया। जो करना था, उसी समय किया। मैंने कभी ‘कल’ पर भरोसा नहीं किया।”
“और तुम?” उसने अर्जुन से पूछा।
अर्जुन चुप हो गया। उसे एहसास हुआ कि उसने अपनी जिंदगी का बहुत सारा समय बस सोचने और टालने में बर्बाद कर दिया।
बूढ़ा आदमी आगे बोला,
“जब तक रास्ते समझ में आते हैं, तब तक लौटने का वक्त हो जाता है।”
यह बात अर्जुन के दिल में उतर गई।
उस दिन के बाद अर्जुन ने फैसला किया कि वह अब और समय बर्बाद नहीं करेगा। उसने अपने सपनों पर काम करना शुरू किया, मेहनत की, और धीरे-धीरे अपनी जिंदगी बदलने लगा।
सालों बाद जब वह सफल हुआ, तो उसने उसी पार्क में जाकर उस बूढ़े आदमी को ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिला।
शायद वह सिर्फ एक सीख देने आया था।
यह कहानी हमें सिखाती है कि
👉 जिंदगी कभी छोटी नहीं होती
👉 हम ही उसे जीने में देर कर देते हैं
👉 सही समय हमेशा “अभी” होता है
Conclusion:
जिंदगी हमें हर दिन एक नया मौका देती है। हमें बस उसे सही समय पर पहचानकर जीना शुरू करना है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें