हम जीना ही देर से शुरू करते हैं एक शहर में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। वह बचपन से ही बहुत सपने देखता था — बड़ा आदमी बनना, खूब पैसा कमाना, दुनिया घूमना। लेकिन एक समस्या थी — वह हर काम को टालता रहता था। अर्जुन हमेशा सोचता, “अभी तो बहुत समय है, बाद में कर लेंगे।” उसके दोस्त मेहनत करते रहे, आगे बढ़ते रहे, लेकिन अर्जुन बस सोचता ही रह गया। उसने कई मौके गंवा दिए, लेकिन उसे कभी लगा ही नहीं कि वह पीछे रह रहा है। समय धीरे-धीरे बीतता गया। अर्जुन की उम्र 30 साल हो गई, लेकिन वह अभी भी वहीं खड़ा था जहाँ से उसने शुरुआत की थी। एक दिन वह पार्क में बैठा था। उसने देखा कि एक बूढ़ा आदमी एक बैग लेकर धीरे-धीरे रास्ते पर चल रहा है। उस आदमी के चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। अर्जुन ने सोचा, “इतनी उम्र में भी यह आदमी इतना शांत कैसे है?” वह उसके पास गया और पूछा, “बाबा, क्या आप खुश हैं?” बूढ़ा आदमी मुस्कुराया और बोला, “हाँ बेटा, मैं बहुत खुश हूँ। क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी समय पर जी ली।” अर्जुन को यह बात समझ नहीं आई। उसने पूछा, “इसका क्या मतलब?” बूढ़ा आदमी बोला, “जिंदगी छोटी नहीं होती बेटा, हम ही जी...
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